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2015 की सबसे अच्छी management book: Andy Grove (पूर्व Intel CEO) की "High Output Management"

Andy Grove की 1983 की management classic पढ़ते ही मेरी पहली प्रतिक्रिया थी — काश यह किताब 5-6 साल पहले पढ़ी होती। इसने मेरी team को manage करने का तरीका पूरी तरह बदल दिया होता।

मुझे Ben Horowitz की एक समीक्षा के ज़रिए Andy Grove की यह किताब "High Output Management" मिली (मैं पिछले कुछ सालों से Menlo Park स्थित venture capital firm Andreessen Horowitz का fan रहा हूँ)। इसे पढ़ते ही मन में पहला ख्याल आया — काश यह 5-6 साल पहले पढ़ी होती। इसने मेरे काम करने के तरीके और जिस team को मैंने manage किया/कर रहा हूँ, उसे संभालने में सच में बड़ा फर्क डाला होता।

किताब 1983 में लिखी गई, बेहद सीधे और तार्किक अंदाज़ में। The New York Times, The Wall Street Journal, Mark Zuckerberg, Peter Drucker, Bill Campbell की इस पर इतनी अच्छी टिप्पणियाँ हैं कि मैं बार-बार खुद से पूछता रहा — यह मुझे पहले क्यों नहीं मिली? 30 से ज़्यादा साल बाद भी इसमें बताए गए अधिकांश सिद्धांत आज भी उतने ही लागू और प्रासंगिक लगते हैं।

तो यह किताब किसके लिए है? Andy ने इसे "middle manager — किसी भी organization के अक्सर भूले हुए इंसान" के लिए लिखा था, लेकिन मेरे अनुभव में यह किताब इतनी insights से भरी है कि CEO, entrepreneurs, directors और हर स्तर के managers के लिए, हर तरह की और हर size की कंपनियों के लिए उतनी ही उपयोगी है।

मैं आपको ज़ोर देकर कहूँगा कि इसे पढ़ें — आप high output management का एक बहुत ही पद्धतिगत दृष्टिकोण सीखेंगे। Andy ने अपनी बात को concrete उदाहरणों से समझाया है — breakfast factory manage करने जितनी बुनियादी बात से लेकर Intel जैसी multi-billion dollar corporation तक।

Andy की किताब ने मेरे कई सवालों के जवाब दिए:

  • किसी company में एक manager का output क्या होता है?
  • हम high managerial productivity कैसे हासिल करते हैं?
  • मैं अपने direct reports के लिए KPIs कैसे तय करूँ, जो खुद managers या senior managers हैं?
  • क्या dual reporting काम करता है? और किन परिस्थितियों में?
  • "limiting step" के इर्द-गिर्द पूरी operation कैसे plan करें? यह मुझे वह सबक याद दिलाता है जो मेरी माँ ने अनजाने में सालों पहले सिखाया था। उन्होंने बताया था कि वे teaching करते हुए भी घर पर लंच करीब आधे घंटे में कैसे तैयार कर लेती थीं — ताकि हम सब मिलकर खाना खा सकें। उन्होंने instinctively "limiting step" के आधार पर अपना काम plan किया था।
  • मैं जिस operation को manage करता हूँ उसके लिए सही indicators कैसे चुनूँ?
  • Meetings में कितना समय देना चाहिए? लोग अक्सर कहते हैं कि meetings में बहुत समय नहीं जाना चाहिए, लेकिन यह कैसे तय करें कि कौन-सी meeting एक manager के लिए ज़रूरी है? यह अलग-अलग managerial activities से कैसे जुड़ता है?
  • अच्छे one-to-one meetings कैसे चलाएँ/बनाए रखें? हफ्ते में कितने one-to-one meetings होने चाहिए? इसके फायदे और नुकसान क्या हैं?
  • मुझे hands-on manager बनना चाहिए या hands-off? किस परिस्थिति में अपना approach बदलना चाहिए?

बस आज के लिए इतना ही। मुझे उम्मीद है आप इस किताब का उतना ही आनंद लेंगे जितना मैंने लिया। कोई टिप्पणी हो तो नीचे लिखें या chandlerblog@gmail.com पर संपर्क करें।

शुभकामनाओं सहित, Chandler

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